नशामुक्ति के लिए जनहित में सूचनार्थ

 

Gate No. 1, Dream City Colony, Kanker kheda, Sardhana Road, Meerut.

सलाह से पहले व्यसन के बारे जानने योग्य तथ्य:

सामान्यतः व्यसन (नशे) के दो भाग होते हैं, पहला - मानसिक, जिसमे व्यक्ति के मन में यह भाव घर कर जाता है कि सहज रहने के लिए या सामान्य जीवनयापन के लिए उसे व्यसन की ज़रुरत है। दूसरा, जिसमे रोगी का शरीर व्यसन की उपलब्धता का आदि बन जाता है, उसे क्रमवार तरीके से अधिक व्यसन की मात्रा की ज़रुरत पड़ती है और व्यसन की प्रचुर मात्रा का सेवन न करने पर नकारात्मक प्रभाव होता है जिसे withdrawal कहते हैं।

      सामाजिक अवहेलना और रोगी की स्वयं की आदत समझे जाने के कारण बहुत कम रोगी ही चिकित्सीय मदद का लाभ व्यसनमुक्त होने के लिए उठा पाते हैं। सबसे अधिक किये जाने वाले व्यसन में शराब, तम्बाकू/सिगरेट/बीड़ी, भांग/सुल्फा/गांजा, और स्मैक/हैरोइन/फोर्ट्विन इंजेक्शन/स्पास्मोप्रोक्सिवान कैप्सूल का नशा होता है और अन्य प्रकार में गोलियाँ, अलप्रेक्स, डायजेपाम, कोरेक्स सिरप, इत्यादि आते हैं। व्यसन से होने वाले नुकसान जायजा लेने पर पता चलता है कि शराब दिमाग की गतिविधि को धीमा करता है चोट और एक्सीडेंट के साथ साथ कई प्रकार के कैंसर का भी कारण होता है। तम्बाकू प्रयुक्त पदार्थ में मुख्य कारक nicotine होता है, तम्बाकू ह्रदय और फेफड़े सम्बंधित रोगों के साथ फालिज़ और कैंसर का भी ज़बरदस्त कारक है। इसी तरह से भांग सम्बन्धी नशा फेफड़े सम्बन्धी रोग और साइकोसिस का कारक होता है। स्मैक/हैरोइन/फोर्ट्विन इंजेक्शन/स्पास्मोप्रोक्सिवान सम्बन्धी नशा काफ़ी तीव्र होता है और स्वयं इसे त्यागना काफ़ी मुश्किल होता है। नशे द्वारा सीधे तौर पर होने वाले नुक्सान के अलावा अप्रत्यक्ष रूप से संक्रमित इंजेक्शन के इस्तेमाल से HIV और अन्य रोगों का भी खतरा रहता है। नशे की हालत में ट्रैफिक एक्सीडेंट या अन्य जानलेवा चोट का भी खतरा रहता है। व्यसन पारिवारिक कलह, सामाजिक कलह, स्कूल में अनुपस्तिथि, काम में पिछड़ापन, चोरी, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न में लिप्तता और क्रिमिनल गतिविधियों में संलिप्तता की संभावना को बढ़ाता है। यानि कि सम्पूर्ण रूप से देखा जाये तो किसी भी प्रकार का व्यसन रोगी के जीवन के हर छोटे या बड़े आयाम पर दुष्क्रियात्मक प्रभाव डालता है।

यदि आप या आपका निकट सम्बन्धी भी व्यसन (नशे) की परेशानियों से जूझ रहे है और स्वयं कोशिश करने पर इससे मुक्त नहीं हो पा रहे हैं, तो चिकित्सीय मदद से इसे आसानी से छोड़ा जा सकता है। सलाह के लिए निर्धारित ओ०पी०डी० वाले दिन समयानुसार मिलें।

नियमित ओ०पी०डी०: सोमवार से शुक्रवार; सांय 4:00 से 7:00 बजे

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