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नशामुक्ति के लिए जनहित में सूचनार्थ

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  सलाह से पहले व्यसन के बारे जानने योग्य तथ्य: सामान्यतः व्यसन (नशे) के दो भाग होते हैं, पहला - मानसिक, जिसमे व्यक्ति के मन में यह भाव घर कर जाता है कि सहज रहने के लिए या सामान्य जीवनयापन के लिए उसे व्यसन की ज़रुरत है। दूसरा, जिसमे रोगी का शरीर व्यसन की उपलब्धता का आदि बन जाता है, उसे क्रमवार तरीके से अधिक व्यसन की मात्रा की ज़रुरत पड़ती है और व्यसन की प्रचुर मात्रा का सेवन न करने पर नकारात्मक प्रभाव होता है जिसे withdrawal कहते हैं।       सामाजिक अवहेलना और रोगी की स्वयं की आदत समझे जाने के कारण बहुत कम रोगी ही चिकित्सीय मदद का लाभ व्यसनमुक्त होने के लिए उठा पाते हैं। सबसे अधिक किये जाने वाले व्यसन में शराब, तम्बाकू/सिगरेट/बीड़ी, भांग/सुल्फा/गांजा, और स्मैक/हैरोइन/फोर्ट्विन इंजेक्शन/स्पास्मोप्रोक्सिवान कैप्सूल का नशा होता है और अन्य प्रकार में गोलियाँ, अलप्रेक्स, डायजेपाम, कोरेक्स सिरप, इत्यादि आते हैं। व्यसन से होने वाले नुकसान जायजा लेने पर पता चलता है कि शराब दिमाग की गतिविधि को धीमा करता है चोट और एक्सीडेंट के साथ साथ कई प्रकार के कैंसर का भी कारण होत...